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जुगलबन्दी-03

1.
दीप दीपावली के हज़ारों नये
, मेरी अँगनाई में मुझको घेरे रहे
किन्तु थे वे सभी बातियों के बिना, इसलिये छाये फिर भी अँधेरे रहे
रोशनी की किरण, इस गली की तरफ़, आते आते कहीं पर अटक रह गई
ज़िन्दगी के क्षितिज पर उमड़ते हुए, बस कुहासों के बादल घनेरे रहे

----------------------------------------------राकेश खंडेलवाल, Dated: 6/16/2006 06:27:03 AM.

2.

कोई तो आकर दीप जलाए

दिल में छुपे है घोर अँधेरे
कोई तो आकर दीप जलाए ॥
यादों के साए मीत है मेरे
कोई उन्हें आकर सहलाए ॥

टकरा कर दिल यूँ है बिखरा
तिनका तिनका बन कर उजडा
चूर हुआ है ऐसे जैसे
शीशों से शीशा टकराए॥

चोटें खाकर चूर हुआ जो
जीने पर मजबूर हुआ वो
जीना मरना बेमतलब का
क्या जीना जब दिल मर जाए॥

चाह में तेरी खोई हूँ मैं
जागी हूँ ना सोई हूँ मैं
सपनों में वो आके ऐसे
आँख मिचौली खेल रचाए॥

तेरे मिलन को देवी तरसे
तू जो मिले तो नैना बरसे
कोई तो मन की प्यास बुझाए
काली घटा तो आए जाए॥

----------------------------------------------Devi Nangrani, Dated: Wed, 21 Jun 2006 20:49:15 -0000

जुगलबन्दी-02


1.
नरगिस

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
लहरा कर, सरसरा कर , झीने झीने पर्दो ने,
तेरे, नर्म गालोँ को जब आहिस्ता से छुआ होगा
मेरे दिल की धडकनोँ मेँ तेरी आवाज को पाया होगा
ना होशो ~ हवास मेरे, ना जजबोँ पे काबु रहा होगा
मेरी रुह ने, रोशनी मेँ तेरा जब, दीदार किया होगा !
तेरे आफताब से चेहरे की उस जादुगरी से बँध कर,
चुपके से, बहती हवा�"ँ ने,भी, इजहार किया होगा
फैल कर, पर्दोँ से लिपटी मेरी बाहोँ ने, फिर् , तेरे,
मासुम से चेहरे को, अपने आगोश मेँ, लिया होगा ..
तेरी आँखोँ मेँ बसे, महके हुए, सुरमे की कसम!
उसकी ठँडक मेँ बसे, तेरे, इश्को~ रहम ने,
मेरे जजबातोँ को, अपने पास बुलाया होगा
एक हठीली लट जो गिरी थी गालोँ पे,
उनसे उलझ कर मैँने कुछ �"र सुकुन पाया होगा
तु कहाँ है? तेरी तस्वीर से ये पुछता हूँ मैँ..
आई है मेरी रुह, तुझसे मिलने, तेरे वीरानोँ मैँ
बता दे राज, आज अपनी इस कहानी का,
रोती रही नरगिस क्युँ अपनी बेनुरी पे सदा ?
चमन मेँ पैदा हुआ, सुखन्वर, यदा ~ कदा !!
---------------------------------Lavanya Shah, Dated: Sun, 07 May 2006 19:34:59 -0000


2.

कैसे पलकें उठाऊँ मैं अपनी
आईना देख कर है शरमाया...
---------------------------------Devi Nangrani, Dated: Tue, 09 May 2006 17:50:55 -0000

3.

रात की उँगलियाँ
आँखों पे फिराता था क्यों
चाँद पानी की सतह
पर तैरता था क्यों
वो हसीन ख्वाब आँखों
में सोता था क्यों
जो तस्वीर सचमुच कहीं भी नहीं
उसकी याद में
शब भर रोता था क्यों

---------------------------------Pratyaksha Sinha, Dated: Thu, 10 May 2006 12:30:35 AM

4.

गज़ल: HusN hi Husn
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ऐ हुस्न तेरी शमा यूँ जलती रहे सदा
कैसे दूँ दाद हाथ को, जिसकी तू है शफा.१
सुँदर सी सुरमई तेरी आँखें जो देख ली
पलकें झपक सकी न मैं नज़रें उसे मिला.२
अँगडाइयां है लेता यूं तेरा जवाँ बदन
सिमटाव देखकर तेरा शरमाए आइना.३
पलकें झुकी ही जाती क्यों जब शीशा सामने?
वो बेमिसाल थी तेरी शरमाने की अदा.४
झुकती रही न उठ सकी, झुककर वो एक बार
है लाजवाब हुस्न तू, तेरी गज़ब अना या
सजदा करे ऐ हुस्न! तुझे मेरी ये वफा. ५
जीने की कुछ तो दे मुझे मोहलत ऐ मौत तू
देवी निभा रही सदा, अब तू भी तो निभा.६

---------------------------------Devi Nangrani, Dated: Thu, 11 May 2006 20:47:30 -0000

जुगलबन्दी-01




१. आस का दामन
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यकीन की डोर पकड़ कर
आस का दामन छूने की तमन्ना
मेरे इस मासूम से मन को
अब तक है
जो ज़िंदगी की दल दल में
धँसता चला जा रहा है
पर,
सामने सूरज की रौशनी
आस की लौ बनकर
मौत के दाइरे में
जीवन का हाथ थाम रही है.
जब तक सांसें हैं
तब तक जीवन है
�"र,
जीवन अनमोल है.

----------------------- By: Devi Nangrani, Dated: Mon, 17 Apr 2006 20:06:44 -0000

2. माँ, मुझे फिर जनो ....
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" देखो, मँ लौट आया हुँ !
अरब समुद्र के भीतर से,
मेरे भारत को जगाने
कर्म के दुर्गम पथ पर
सहभागी बनाने, फिर,
दाँडी ~ मार्ग पर चलने
फिर एक बार शपथ ले,
नमक , चुटकी भर ही
लेकर हाथ मँ, ले,
भारत पर निछावर होने
मँ, मोहनदास गाँधी,
फिर, लौट आया हूँ ! "

-----------------------By: Lavanya Shah, Dated: Fri, 21 Apr 2006 11:02:42 -0000

3.

मन पानी सा छलक छलक ,
उसमें तैरे ये जीवन
था तपता सूरज जो कभी
चाहें शीतलता अब वो मन

बार बार इच्छाएं पर
अपना हाथ बढ़ाती हैं,
खिंचा चला जाता हूं मोह में,
तृष्णांए मुस्काती हैं

है विदित मुझे,
नहीं समय ये,
आकांक्षाएं सहलाने का
हृदय के नभ के,
एक छोर से
दूजे तक भी जाने का
पर आस का दामन
फैला एसा
जो शक्ति मुझे देता

मैं कृषकाय
और क्षीण सही पर
गान विजय के गाऊंगा,
हाथ बढ़ा कर गिरी शिखर पर
कभी पंहुच तो पाऊंगा

यदि संभव न हो ऐसा
तो क्षोभ नहीं ना कुंठाघात
प्रयत्नों की बलिवेदी पर
रणनायक कहलाऊंगा.
-----------------------By: Renu Ahuja, Dated: Fri, 28 Apr 2006 6:42 AM